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रविवार, 20 सितंबर 2009

रविवासरीय साप्ताहिक पहेली-3


रविवासरीय साप्ताहिक पहेली-3 में

आप सबका स्वागत है।
आपको पहचान कर निम्नांकित चित्र का

नाम और स्थान बताना है।


उत्तर देने का समय 22सितम्बर सायं 5 बजे तक।

परिणाम मंगलवार 23सितम्बर को

सुबह 5बजे प्रकाशित किये जायेंगे।

पहले सही उत्तर देने वाले प्रतिभागी को

नम्बर-1 दिया जायेगा

और पहेली का विजेता घोषित किया जायेगा।

इन्हें रविवासरीय आन-लाइन प्रमाणपत्र दिया जायेगा।
जिसे वह अपने ब्लॉग पर लगाने के अधिकृत होंगे।

सही उत्तर देने अन्य प्रतिभागियों को

क्रमश: 2-3-4-5- के स्थान पर रखा

रविवासरीय साप्ताहिक पहेली - अगले रविवार को

सायं 5 बजे प्रकाशित की जायेगी।

9 टिप्‍पणियां:

http://bhartimayank.blogspot.com ने कहा…

श्री समीर लाल जी(उड़नतश्तरी)की 2टिप्पणियाँ अभी तक प्राप्त हुई हैं।

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

लो जी अब उडनतश्तरी के बाद क्या बाकी बचा होगा? हमारा नम्बर तो अब लगने से रहा.:)

पर अब आ ही गये हैं तो बता ही देते हैं कि हम जब बदायूं गये थे तब इसके बारे मे जाना था. ये वहां का
"परियों का कुआ" होना चाहिये...होना क्या चाहिये? पक्का वही है रामराम.

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

परीयों का कुआँ, बदायूँ

संगीता पुरी ने कहा…

श्री समीर लाल जी को बधाई !!

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) ने कहा…

समीर लाल जी (उड़नतश्तरी) को जीत की अग्रिम शुभकामनाएं

हैपी ब्लॉगिंग

वन्दना ने कहा…

hamein bhi janne ki utsukata rahegi..........vaise ye bheem ke liye khana banane mein istemal hone wali degchi to nhi...........hahahahaha.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत बढ़िया!
यह तो परियों का कुआँ है।

http://bhartimayank.blogspot.com ने कहा…

Udan Tashtari मुझे को
विवरण दिखाएं २० सितम्बर (1 दिन पहले)

Udan Tashtari ने आपकी पोस्ट " रविवासरीय साप्ताहिक पहेली-3 " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:
परियों का कुँआ -बदायूँ

http://bhartimayank.blogspot.com ने कहा…

Udan Tashtari मुझे को
विवरण दिखाएं २० सितम्बर (1 दिन पहले)

Udan Tashtari ने आपकी पोस्ट " रविवासरीय साप्ताहिक पहेली-3 " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

और जानकारी सभी के लिए:

रुहेलखण्ड क्षेत्र में कुँओं की उपासना का प्रचलन भी है। इन कुँओं में बदायूँ नगर के समीप स्थित परियों का कुँआ विशेष रुप से उल्लेखनीय है।

इस कुँए के बारे में एक किंवदंति है। इस किवंदति के अनुसार - एक बार मुगल बादशाह अकबर सन्तान प्राप्ति की मन्नत माँगने बदायूँ में स्थित छोटे सरकार की जारत पर आए। उनके साथ उनकी पत्नी जोधाबाई भी थीं। अकबर जोधाबाई के साथ इस कुँए के निकट से गुजरे। कुछ दूर जाकर जोधाबाई ने देखा कि सफेद वस्र धारण किए हुए कुछ स्रियां इस कुंए के जल से स्नान कर रही हैं। यह देखकर जोधाबाई इस कुँए की ओर बढ़ीं।

किन्तु कुँए के निकट आते ही वह स्रियाँ अदृश्य हो गई। कुछ स्थानीय लोगों ने जोधाबाई को बताया कि ये स्रियाँ संभवतः परियाँ थीं। जोधाबाई ने इस कुंए के जल से स्नान किया। इसके उपरान्त वे छोटे सरकार की जारत पर गई। छोटे सरकार ने जोधाबाई को दिव्य रुप से यह संकेत दिया कि उन्हें सन्तान की प्राप्ति होगी। बाद में अकबर के यहाँ सलीम का जन्म हुआ। "तभी से इस कुँए के साथ यह मान्यता जुड़ी हुई है कि इसके जल से स्नान करने पर स्रियों को सन्तान की प्राप्ति अवश्य होती है।

आज भी प्रतिदिन ऐसी असंख्य स्रियाँ इस कुँए के जल से स्नान करती हैं जिनको सन्तान प्राप्ति नहीं हो सकी है। स्रियों के मन में यह भावना अत्यन्त प्रबल है कि इस कुँए के जल के स्नान द्वारा मनचाही सन्तान प्राप्त होगी।

सन्तान प्राप्ति की इच्छुक स्रियाँ लगातार छः बुधवार को यहाँ आकर स्नान करती हैं।

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